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बिलासपुर में 17.24 करोड़ का स्नेक बाइट मुआवजा घोटाला, महिला डॉक्टर के बाद SDM ऑफिस के 3 बाबू गिरफ्तार
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बिलासपुर में 17.24 करोड़ का स्नेक बाइट मुआवजा घोटाला, महिला डॉक्टर के बाद SDM ऑफिस के 3 बाबू गिरफ्तार

Mor Anchal Desk 20 July 2026
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बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए 17.24 करोड़ रुपए के SNAKE BITE मुआवजा घोटाले में पुलिस लगातार बड़ी कार्रवाई कर रही है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने के आरोप में तत्कालीन महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद अब जांच SDM ऑफिस और तहसील कार्यालय तक पहुंच गई है।

सरकंडा पुलिस ने रविवार को SDM ऑफिस के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने फर्जी सर्पदंश प्रकरण दर्ज कर अपने आईडी से रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर शासन से मुआवजा स्वीकृत कराया गया।

विधानसभा में उठा था मुद्दा

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सर्पदंश मुआवजा घोटाले का मुद्दा उठाया। इसके बाद सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए।

431 मौतें दिखाकर लिया गया 17.24 करोड़

जांच में सामने आया कि जशपुर जिले में पिछले तीन वर्षों में केवल 96 सर्पदंश मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा बांटा गया।

शासन के नियमों के अनुसार, सांप काटने से मौत पर 4 लाख रुपए मुआवजा दिया जाता है। इसी प्रावधान का दुरुपयोग कर कई सामान्य मौतों को सर्पदंश बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

बिना परिजनों की सहमति के भी निकाला गया मुआवजा

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में परिजनों की जानकारी या सहमति के बिना मुआवजा राशि निकालकर उसका बंदरबांट किया गया। इसके लिए मौत का कारण बदलकर आवेदन लगाए गए और फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई।

महिला डॉक्टर पहले ही जा चुकी हैं जेल

एक दिन पहले तोरवा पुलिस ने सिम्स की तत्कालीन महिला डॉक्टर डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उन पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाकर सरकार को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

तहसीलदार का ड्राइवर बना मुख्य सरगना

पुलिस जांच में तहसील कार्यालय में निगम से अटैच ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा को इस पूरे घोटाले का मुख्य सरगना बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने राजस्व कर्मचारियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी मुआवजा रिपोर्ट तैयार कराने में अहम भूमिका निभाई।

14 FIR दर्ज, कई डॉक्टर रडार पर

अब तक इस मामले में 14 FIR दर्ज हो चुकी हैं। पुलिस के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में अलग-अलग मामलों में रिपोर्ट देने वाले दर्जन भर डॉक्टरों से पूछताछ जारी है। सिम्स और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के कई डॉक्टर भी पुलिस की रडार पर हैं।

पुलिस का बड़ा दावा

एसएसपी रजनेश सिंह स्वयं इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि घोटाले में शामिल अधिकारी, कर्मचारी, डॉक्टर, वकील और बिचौलियों के पूरे सिंडिकेट की जांच की जा रही है और आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।