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रायपुर | जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल गुरुवार को केंद्रीय कारागार रायपुर से रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट से 17 जुलाई 2026 को जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई हुई। उनके साथ छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश सह सचिव दिनेश वर्मा भी जेल से बाहर आए। रिहाई के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक केंद्रीय जेल के बाहर मौजूद रहे और "छत्तीसगढ़ महतारी की जय" तथा "जोहार छत्तीसगढ़" के नारों के बीच उनका स्वागत किया।

जेल से बाहर निकलते समय अमित बघेल अपने हाथ में छत्तीसगढ़ महतारी का चित्र लिए दिखाई दिए। इसके बाद समर्थकों के साथ उनका काफिला शहर के विभिन्न स्थानों पर पहुंचा, जहां उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर, शहीद वीर नारायण सिंह और डॉ. खूबचंद बघेल की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
करीब साढ़े सात महीने बाद जेल से बाहर आए
अमित बघेल ने 5 दिसंबर 2025 को पुलिस के समक्ष समर्पण किया था। इसके बाद वे लगभग 7 महीने 17 दिन तक जेल में रहे। वहीं डॉ. अजय यादव और दिनेश वर्मा को जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था और वे करीब छह महीने से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहे।

इन नेताओं के खिलाफ बलौदाबाजार में 10 जून 2025 को हुई हिंसा और आगजनी से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे पहले रायपुर स्थित वीआईपी चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा तोड़े जाने के विरोध से जुड़े एक मामले में भी अमित बघेल का नाम सामने आया था।
“संविधान के दायरे में संघर्ष जारी रहेगा”
रिहाई के बाद मीडिया और समर्थकों को संबोधित करते हुए अमित बघेल ने कहा कि उन्होंने और उनके संगठन ने पूरी न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया है। उनका दावा था कि उनके खिलाफ दर्ज मामले निराधार हैं और उनका आंदोलन छत्तीसगढ़ तथा छत्तीसगढ़िया समाज के हितों से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगा और "2028 में छत्तीसगढ़ियावादी सरकार बनाने" का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेगा।

डॉ. अजय यादव का बयान
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव ने कहा कि संगठन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर जनहित के मुद्दों को उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता छत्तीसगढ़ महतारी और प्रदेश के हितों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन के कार्यकर्ता जनआंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और यदि जनहित के मुद्दों पर संघर्ष के दौरान जेल जाना पड़े तो उससे भी पीछे नहीं हटेंगे।
सीधे दुर्ग के लिए रवाना हुआ काफिला
रिहाई के बाद समर्थकों के साथ विभिन्न स्थलों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने के पश्चात अमित बघेल का काफिला न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए उनके रायपुर स्थित निवास जाने के बजाय सीधे दुर्ग जिले की ओर रवाना हो गया।